आज विभिन्न राजनैतिक दलों ,जनसंगठनों तथा महिला संगठनों ने संयुक्त संघर्ष समिति के वैनर तले आज जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया तथा तहसीलदार मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा उन्होंने अपने स्तर से आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया ।
प्रदर्शनकारियों संरक्षक नवनीत गुसांई,सीपीआईएम सचिव अनन्त आकाश ,बरिष्ठ आन्दोलनकारि सरिता गौड़,राष्ट्रीय उत्तराखण्ड पार्टी के महासचिव बालेश बबानिया, सीआईटीयू के उपाध्यक्ष भगवन्त पयाल ,यूकेडी के महानगर अध्यक्ष बृजेन्द्र रावत, बरिष्ठ नेत्री प्रमिला रावत,पुष्पलता वैश्य,नेताजी संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रभात डण्डरियाल, प्रवक्ता चिन्तन सकलानी ,जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार, राजेश शर्मा, विकास रावत ,अमित परमार ,सुभागा फर्स्वाण,जगमोहन रावत ,मुकेश मोधा ,द्वारिका प्रसाद डिमरी ,कल्पेश्वरी नेगी ,बलबीर सिंह ,नारायणसिंह ,मौहम्मद इकबाल ,पुरूषोत्तम सेमवाल, महेश्वरी चौधरी ,गीता नेगी,राजेश्वरी रावत ,मीरा गुंसाई ,सुलोचना ,आशा डंगवाल,राजपाल थापा ,मनमोहन चौधरी, गुरू प्रसाद,जमुनादेवी सहित दर्जनों प्रदर्शनकारी शामिल थे ।
ज्ञापन में निम्नलिखित :-
महामहिम ,उत्तराखण्ड राज्य में सितम्बर 2022 में हुआ अंकिता भंडारी जधन्य हत्याकाण्ड उत्तराखण्ड राज्य में महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा के प्रति असंवेदनशीलता और ऐसे अपराधियों को मिल रहे सरकारी संरक्षण एक शर्मनाक उदाहरण है। अंकिता एक 19 वर्षीय युवती जिसने अपने परिवार को सहारा देने के लिए अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर एक रिजोर्ट में काम करना शुरू किया। रिजोर्ट भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य का था। भाजपा नेता के बेटे द्वारा अंकिता पर एक वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने का दबाव बनाया गया। अंकिता ने स्पेशल सर्विस देने का विरोध किया और जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। घटना के बाद सरकार के इशारे पर रिजोर्ट पर बुलडोजर चलाया गया, जिसका पूरे राज्य में व्यापक विरोध हुआ और जो निश्चित रूप से सबूतों को मिटाने का प्रयास था जो सफल भी हुआ। इस केस में पहले दिन से उत्तराखणड की भाजपा सरकार पुलकित आर्य और वीआईपी को बचाने का प्रयास करती हुई दिखी। व्यापक जन दबाव और प्रदर्शनों के पश्चात पुलकित आर्य और अन्य दो को सजा हुई। इस केस के निर्णय में साफ है कि हत्या का कारण वीआईपी को स्पेशल सर्विस देना था। किन्तु उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार द्वारा उस वीआईपी को खोजने का कोई प्रयास नहीं किया गया। अब हाल में कुछ वीडियो और ऑडियो लिंक के माध्यम से यह बात सामने आई कि वीआईपी गट्टू उर्फ दुष्यंत कुमार गौतम हो सकता है, जो कि उत्तराखण्ड भाजपा का प्रभारी है और भाजपा का अखिल भारतीय सचिव भी है। आज उत्तराखण्ड की जनता आन्दोलनरत है और उनका एक ही सवाल है गट्टू कौन है? भाजपा सरकार अभी भी अंकिता को न्याय देने को लेकर गम्भीर नहीं है और अभी भी वीआईपी को बचा रही है। उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार की यह मनमानी और असंवेदनशीलता अपराधियों और वीआईपी को कानून के दायरे में लाने से बच रही है क्योंकि कोर्ट को फैसले में हत्या का कारण वीआईपी को स्पेशल सर्विस देना है। अंकिता भण्डारी की हत्या का मामला सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं है, अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई महिलाओं के शोषण, वस्तुकरण के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई है। वनंत्रा रिजोर्ट का जो वर्णन अंकिता भंडारी केस के फैसले में है वह राज्य में बढ़ते वेश्यावृत्ति और मानव तस्करी के नेटवर्क की एक झलक मात्र है। अगर वीआईपी यह गट्टू नहीं भी है तो कौन है ? उसे ढूंढा जाना चाहिए और महिलाओं के इस शोषण और अपराधियों को कानून के दायरे लाया जाना चाहिए।
महामहिम ,अंकिता भंडारी की हत्या की पूरी घटना उत्तराखण्ड राज्य में भाजपा के वैचारिक ढांचे और क्रियाकलाप का वर्णन है, जहाँ भाजपा सरकार की मनमानी, महिलाओं का वस्तुकरण, यौन शोषण की व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों को मिल रही मनमानी छूट का उदाहरण मात्र है कि किसप्रकार सत्ता के दुरुपयोग से न्याय को बाधित किया जाता है।
महामहिम ,अंकिता भण्डारी का जन्म 11 नवंबर 2003 को पौड़ी गढ़वाल जिले के डोभ-श्रीकोट गांव में हुआ था। वह एक साधारण ग्रामीण परिवार से थीं, जहाँ पिता वीरेंद्र सिंह भण्डारी और मां सोना देवी ने उन्हें मेहनती और महत्वाकांक्षी बनाया था। अंकिता का सपना था कि वह परिवार की मदद करे और खुद आत्मनिर्भर बने। 2021 में उन्होंने देहरादून के श्री राम इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया था, लेकिन कोविड 019 महामारी के दौरान पिता की नौकरी छूटने से पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि अंकिता को जल्दी नौकरी ढूंढनी पड़ी। उत्तराखण्ड के पहाड़ी इलाकों में पर्यटन उद्योग भी युवतियों के लिए एक विकल्प है, लेकिन इसमें जोखिम भी बहुत हैं, जैसा कि अंकिता के मामले में साबित हुआ। यह उद्योग महिलाओं को वस्तु की तरह इस्तेमाल करता है, जहाँ यौन शोषण आम है और सरकार की निष्क्रियता तथा मनमानियां इसे बढ़ावा देती है।
महामहिम,28 अगस्त 2022 को अंकिता ने ऋषिकेश के पास भोगपुर/गंगा-भोगपुर स्थित वनंतरा रिजोर्ट (यमकेश्वर क्षेत्र, पौड़ी गढ़वाल) में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की। मासिक वेतन ₹10,000 का वादा था। रिजोर्ट पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के पुत्र पुलकित आर्य का था, जो राजनैतिक रूप से प्रभावशाली परिवार से आते थे। रिजोर्ट का दैनिक संचालन पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और असिस्टेंट मैनेजर अंकित गुप्ता करते थे। रिजोर्ट पर्यटकों को प्राकृतिक सौन्दर्य, रोमांच और विश्राम का वादा करता था, लेकिन अंदरूनी व्यवस्था में गम्भीर खामियां थीं, जहाँ महिलाओं का शोषण एक व्यवस्थित हिस्सा था। अंकिता का काम चेक-इन/चेक-आउट, मेहमानों की पूछताछ, बुकिंग और प्रशासनिक कार्यों से जुड़ा था, सहकर्मियों ने गवाही दी कि वह बहुत मेहनती, विनम्र और सहयोगी थीं, लेकिन प्रबंधन की मनमानी के कारण बने माहौल ने उनकी नौकरी के दौरान दुखद अन्त में बदल दिया ।
महामहिम,शुरुआत में अंकिता नौकरी से खुश थीं और घर फोन करके परिवार को बताती थी, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी बातों में असहजता और डर आने लगा। उन्होंने दोस्त पुष्पदीप को व्हाट्सएप मैसेज में बताया कि पुलकित आर्य उन्हें बार-बार एक वीआईपी अतिथि को स्पेशल सर्विस या एक्स्ट्रा सर्विसेज (यौन संबंध/अनैतिक कार्य) देने के लिए दबाव डाल रहे हैं। यह शब्द यौन सम्बध या अनैतिक कार्य के लिए इस्तेमाल होता था। अंकिता ने स्पष्ट कहा कि वह 10,000 रुपये के लिए खुद को नहीं बेचेंगी। यह दबाव रिजोर्ट में एक व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा था, जहाँ उच्च-भुगतान वाले मेहमानों को आकर्षित करने के लिए ऐसी मांगें सामान्य थीं। गवाहों जैसे अभिनव कश्यप, खुशराज, विवेक आर्य आदि ने बताया कि अंकिता को कई बार रोते हुए देखा और पुलकित द्वारा दबाव की बहसें भी सुनीं। यह सब भाजपा सरकार की संरक्षण वाली व्यवस्था का हिस्सा था, जहाँ प्रभावशाली लोगों के रिजोर्ट में महिलाओं का वस्तुकरण चलता रहता है।
महामहिम,11 सितंबर 2022 को अंकिता ने अपने दोस्त पुष्पदीप को बताया कि पुलकित आर्य ने उन्हें किस्स करने की कोशिश भी की, यह घटना उत्पीड़न की शुरुआत थी, जो बाद में और बढ़ती गई। परिवार ने भी बताया कि अंकिता की कॉल्स में असहज मांगों का जिक्र आने लगा था, लेकिन शर्म या डर के कारण विस्तार से नहीं बताती थी। यह संकेत था कि रिजोर्ट में महिलाओं का शोषण आम था, और अंकिता जैसे ग्रामीण पृष्ठभूमि की युवतियां आसानी से शिकार बनती थीं।
महामहिम,17 सितंबर 2022 को अंकिता का कमरा नीचे शिफ्ट कर दिया गया। हत्या अपराधी पुलकित आर्या ने कहा कि ऊपर का कमरा मेहमानों को दिया जाएगा, 18 सितंबर 2022 की शाम को तीनों अपराधियों के साथ अंकिता का विवाद हुआ, स्टाफ सदस्य अभिनव कश्यप ने गवाही दी कि पुलकित ने अंकिता का फोन छीन लिया और उन्हें एक घण्टे तक कमरे में बन्द रखा, रात 8:32 बजे अंकिता ने अपने मित्र पुष्पदीप को आखिरी कॉल किया, जिसमें डर और रोने की आवाज थी, तीनों अपराधी किसी बहाने से अंकिता को स्कूटर पर बिठाकर चिल्ला नहर (ऋषिकेश के पास) ले गए और वहाँ धक्का देकर नहर में फेंक दिया, डूबने से उनकी मौत हो गई। यह हत्या सत्ता के संरक्षण में महिलाओं के वस्तुकरण के खिलाफ अंकिता के विरोध की कीमत थी।
महामहिम ,18-19 सितम्बर 2022 को अंकिता लापता हुई। परिवार की शिकायत पर शुरुआती जन दबाव शुरू हुआ और सोशल मीडिया पर ट्रेंड शुरू हुआ। यह ट्रेंड सोशल मीडिया पर तेजी से फैला, जहाँ लोग अंकिता की सुरक्षा और महिलाओं के अधिकारों पर सवाल उठाने लगे, यह शुरुआती दबाव था जो बाद में बड़े आन्दोलन में बदला, जिसने सरकार की असंवेदनशीलता को चुनौती दी।
महामहिम ,परिवार ने 19 सितंबर 2022 को तीन थानों में जीरो एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन राजस्व क्षेत्र होने से पटवारी वैभव प्रताप ने कार्रवाई नहीं की और छुट्टी पर चले गए, 20-21 सितंबर 2022 को स्थानीय प्रदर्शन शुरू हुए, लोग रिजोर्ट के बाहर इकट्ठा हुए, इस दबाव से केस नियमित पुलिस को ट्रान्सफर हुआ। विभिन्न स्तरों से यहाँ से ही सक्रियता दिखाई,और पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए, जो जांच को तेज करने में मददगार साबित हुआ। यह दबाव सरकार की मनमानी को रोकने की शुरुआत थी।
महामहिम ,22 सितंबर 2022रू राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और जन आक्रोश के बीच पुलकित आर्य समेत तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। यह गिरफ्तारियां जनता के दबाव का सीधा नतीजा थीं, जहां सोशल मीडिया और सड़क प्रदर्शन ने सरकार को मजबूर किया।
महमहिम,सुनियोजित षढयन्त्र कै तहत् 23 सितंबर 2022 को भाजपा विधायक रेनू बिष्ट के आदेश पर रिजोर्ट के हिस्से (अंकिता का कमरा) जेसीबी से ढहा दिए गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट और मृतका कै परिवार 25 लाख रुपये मुआवजा का ऐलान किया लेकिन बुलडोजर कार्रवाई के सबूत मिटाने के प्रयास को मजारों को तोड़ने के सामान ही उन्होंने प्रचारित किया। यह कार्रवाई सरकार के इशारे पर हुई, जो वीआईपी को बचाने की कोशिश थी।
महामहिम,24 सितंबर 2022रू शव मिलने के बाद देहरादून, पौड़ी, ऋषिकेश और श्रीनगर में बड़े प्रदर्शन हुए। कैण्डल मार्च, सड़क जाम हुई जिसमें जनता ने भाजपा द्वारा लगातार मामले में लीपापोती करने का विरोध किया। इन प्रदर्शनों में हजारों लोग शामिल हुए, और महिलाओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया। भाजपा सरकार की खुलकर आलोचना की।
महामहिम , 2 अक्टूबर 2022ः को उत्तराखंड बन्द रहा, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। आम जनता ने इस बन्द में प्रमुख भूमिका निभाई, और प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं के अधिकारों पर जोर देकर आंदोलन को मजबूत बनाया। यह बंद पौड़ी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली आदि जिलों में सफल रहा, और सरकार की मनमानी को चुनौती दी।
महामहिम, नवम्बर-दिसम्बर 2022 में निरन्तर कैण्डिल मार्च और धरने, परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की इस दबाव से विधानसभा में बहस हुई, लेकिन बीजेपी द्वारा सीबीआई जांच की मांग को दबाने की लगातार कोशिश की गयी।
महामहिम , जनवरी 2023-मई 2025 ट्रायल के दौरान भी प्रदर्शन हुए, परिवार और विपक्ष ने सीबीआई जांच की मांग की। (इसने केस को फास्ट-ट्रैक रखा, जिससे 30 मई 2025 को तीनों को आजीवन कारावास की सजा मिली।) कोटद्वार कोर्ट में मुकदमा जनवरी 2023 से शुरू हुआ। पहली सुनवाई 30 जनवरी 2023 को हुई। अभियोजन गवाही 28 मार्च 2023 से शुरू हुई। कुल 47 गवाहों ने गवाही दी। 30 मई 2025 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रीना नेगी ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया।
सजाः धारा 302 के तहत आजीवन कारावास , धारा 201 (साक्ष्य मिटाना), धारा 354 (यौन उत्पीड़न/महिला की मर्यादा भंग) एक्ट की धारा 3(1)(क)। धाराओं में सजा हुई यह सजा जन दबाव का नतीजा थी, लेकिन वीआईपी कानून कै दायरै में लाना अभी बाकी है ।
महामहिम,मामला पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं था। इसमें अन्तिम बार साथ देखे जाने का सिद्धान्त निर्णायक साबित हुआ। कर्मचारियों ने अंकिता को तीनों आरोपियों के साथ जाते देखा था। फैसले में स्पष्ट लिखा है कि हत्या का कारण वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने से इनकार था। लेकिन वीआईपी की पहचान या जांच कभी नहीं हुई। पुलकित ने उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की, जो लम्बित है। यह सरकार की मनमानी का प्रमाण है, जो वीआईपी को बचाती रही है।
महामहिम ,इस मामले की जांच के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट भी तैयार की गई, यह रिपोर्ट फरवरी 2023 में प्रकाशित हुई (21 जनवरी 2023 को कंटेंट तैयार) और इसमें कुल 90 पेज हैं। टीम अक्टूबर 2022 की शुरुआत में गठित हुई (हत्या के 40 दिनों बाद, यानि लगभग 28 सितम्बर से 5 अक्टूबर 2022 के बीच) और 27 से 29 अक्टूबर 2022 तक उत्तराखण्ड में रही। टीम ने अपराध स्थलों (चिल्ला नहर जहाँ अंकिता को धक्का दिया गया, शव मिलने का स्थान, वनांत्रा रिसॉर्ट), परिवार के घर (डोभ-श्रीकोट गांव पौड़ी में अंकिता के माता-पिता से मुलाकात), धरना स्थलों (ऋषिकेश में कोयलघाटी), गांवों (गंगा-भोगपुर तल्ला), सिविल सोसाइटीज ग्रुप्स (श्रीनगर, देहरादून) का दौरा किया और स्थानीय लोगों से बात की। टीम ने सरकारी अधिकारियों , चीफ सेक्रेटरी, राज्य महिला आयोग से भी मुलाकात की।
रिपोर्ट में प्रमुख मुद्देः पुलिस की निष्क्रियता, वीआईपी की पहचान न होना, सबूत नष्ट होना, भ् कानून 2013 की अनदेखी, और महिलाओं के लिए राज्य नीति की जरूरत। रिपोर्ट में अंकिता की मौत को वस्तुकरण का प्रतीक बताया गया है, और सरकार की असंवेदनशीलता पर सवाल उठाया गया है।
महामहिम ,22 दिसंबर 2025 में अभिनेत्री उर्मिला सनावर (पूर्व भाजपा विधायक, सुरेश राठौर की कथित पत्नी) ने ऑडियो-वीडियो लीक किए, जिसमें वीआईपी को गट्टू (दुष्यंत कुमार गौतम, भाजपा राष्ट्रीय महासचिव) बताया। (इसने केस को दोबारा सुर्खियों में लाया, नए प्रदर्शनों की शुरुआत की) यह लीक भाजपा सरकार की मनमानी को उजागर करता है, जो वीआईपी को बचाती है।29 दिसंबर 2025रू उर्मिला का एक और वीडियो वायरल, जिसमें उन्होंने पुलिस पर दबाव और कवर-अप का आरोप। इससे राज्यव्यापी आक्रोश बढ़ा, सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ और प्रदर्शन और व्यापक हुए। अंकिता भंडारी हत्याकांड के खिलाफ प्रदर्शन विपक्षी राजनैतिक दलों ,महिला संगठनों, जनसंगठनों ने खुलकर सड़कों पर उतरे ।
महामहिम ,4 जनवरी 2026 को जनता के सीएम आवास हजारों लोगों नै प्रतिभाग किया गया तथा दिल्ली , देहरादून,नैनीताल , हरिद्वार चमोली, अल्मोड़ा,रूद्रप्रयाग ,पौड़ी ,श्रीनर आदि क्षेत्रों में प्रदर्शन शुरूः विपक्ष और सिविल सोसाइटी ने सुप्रीम कोर्ट के जज कि निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की। इस दबाव ने सरकार को मजबूर किया।
महामहिम , 9 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश की। जो कि जन दबाव और प्रदर्शनों का सीधा परिणाम था। लेकिन यह सिफारिश जनता एवं परिवार की मांग जो कि यह थी कि सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज कि निगरानी में हो उसके अनुरूप नहीं थी। यह सीबीआई जांच कि कोरी संस्तुति पुनः हत्यारों और वीआईपी को बचाने की एक और कोशिश रही।
दिनांक 11 जनवरी 2026 को विपक्ष और सिविल सोसाइटी द्वारा उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया था जिसका पार्टी एवं जनसंगठनों के द्वारा अन्य वामपंथी पार्टियों के साथ मिलकर राज्यव्यापी बंद और प्रदर्शन में भागीदारी कि गयी और वीआईपी एंगल पर जांच के लिए दबाव बनाया गया।
यह मामला पर्यटन क्षेत्र में महिलाओं की असुरक्षा, प्रभावशाली परिवारों का राजनीतिक संरक्षण, दूरदराज रिसॉर्टों में न्यूनतम निगरानी और कार्यस्थल सुरक्षा की पूरी कमी को सामने लाता है। वनंतरा रिजोर्ट का फैसले में वर्णन राज्य में बढ़ते वेश्यावृत्ति और मानव तस्करी नेटवर्क की झलक दिखाता है। अंकिता का विरोध रिजोर्ट की अवैध गतिविधियों को खतरे में डाल रहा था, इसलिए हत्या की गई।
अंकिता भंडारी की हत्या सिर्फ एक हत्या नहीं है। यह महिलाओं के शोषण, वस्तुकरण और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई है। भाजपा सरकार पहले दिन से पुलकित आर्य और वीआईपी को बचाने के प्रयास कर रही है। वीआईपी को नहीं खोजा गया तो हत्या का मोटिवे आधारहीन हो जायेगा और जो अपराधी जेल में बन्द हैं उनके भी बरी होने का रास्ता सुलभ हो जायेगा, पूर्ण न्याय के लिए सीबीआई जांच (सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की निगरानी में) जरूरी है, ताकि वीआईपी की असली पहचान, सबूत मिटाने वाले लोग और पूरा नेटवर्क सामने आए।
महामहिम ,उपरोक्त बिन्दुओं को मद्देनजर रखते हुऐ जनभावना ओं को मध्द्दऐनजर रखते जनहित में सरकार को आवश्यक दिशा निर्देश जारी करने की कृपा करें ।
प्रदर्शन शहीद स्थल से शुरू होकर जिलाधकरि कार्यलय पहुंचकर सभा में बदल गया ।