मकर संक्रांति पर गुरूद्वारा साहिब डाकरा में अखंड पाठ का भोग संपन्न, कीर्तन से वातावरण हुआ भक्तिमय

देहरादून 14 जनवरी 2026 साहिबे कमाल, सरबंस दानी श्री गुरू गोबिंद सिह जी महाराज के परोपकारी जीवन के अनमोल इतिहास को याद करते हुए व भगत नामदेव जी की मधुर याद में मकर संक्राती के अवसर पर श्री गुरूद्वारा साहिब डाकरा मे 12. जनवरी .2026 से चल रहे गुरू ग्रन्थ साहिब के अखण्ड पाठ का भोग विधिवत रूप से संपन हुआ। हजूरी रागी गुरूद्वारा डाकरा भाई अजित सिंह द्वारा कीर्तन एवं अरदास की गई।

ज्ञानी अजित सिंह ने शब्द कीर्तन “राजन के राजा महाराजन के महाराजा, ऐसा राज्य छोड़ और दूजा कौन धियाएई’। ‘सगल द्वार कउ छाड़ के गहयो तुहारो द्वार
बाहि गहे की लाज अस गोबिंद दास तुहार’। ‘ धन सो देश जहाँ तू वासिया, मेरे साजन मीत मुरारे जियो’। “तिन का मैं ना करूँ दर्शना, जीन के भितर है अंतरा”। का कीर्तन किया गया।

इसके उपरांत दरबार साहिब अमृतसर (पंजाब) से भाई सुखबीर सिंह ने “देह शिवा बर मोहे ईहे, शुभ कर्मन ते कभुं न टरूं, न डरौं अरि सौं जब जाय लड़ौं, निश्चय कर अपनी जीत करौं’ । ‘चरण कमल मेरे हियरे बेस, जैसे अपने धनहीँ प्राणी मरन मांडे”। “हम अवगुण भरे एक गुण नाही अमृत छाड़ बिखे खाई”।” का कीर्तन किया।

जब भाई अजित सिंह ने “सतनाम वाहे गुरू, वाहे गुरू, वाहे गुरू, वाहे गुरू, वाहे गुरू,” का जाप किया तब पूरा माहोल भक्तिमय हो गया और संगता निहाल हो गई। संगतों ने गुरू महाराज का आशीर्वाद लिया व प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान भारी संख्या मे संगतों ने लंगर छका। शब्द कीर्तन व अरदास के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।

कार्यक्रम मे गुरूद्वारा साहिब डाकरा के प्रधान दलीप सिह, महासचिव गुरमीत सिह कैथ, देवेन्द्र पाल सिह, गुरदीप सिंह, सरवण सिह, सुभम सिंह, अमरजीत सिह, रंजीत कौर, अमरजीत कौर, जसविंदर कौर, कमलजीत कौर, अंगददीप सिंह, स्वर्ण कौर, सरबजीत कौर, त्रिलोचन कौर, इन्दर जीत सिंह, पवन कौर, ज्ञान कौर, मनमीत, हरप्रीत, हरभजन सिंह सोंधी, राजेंद्र कौर सोंधी, रघुवीर सिंह, कुलदीप सिंह, हरमहिन्दर सिंह, सुरजीत सिंह, दलजीत सिंह, मनीत सिंह, कुलदीप सिंह, हरविंदर कौर, अंगद, सहित कई श्रद्धालू मौजूद थे।

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