केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का नाम बदले जाने पर पूर्व महानगर अध्यक्ष लालच चन्द शर्मा ने बयान जारी करते हुए कहा कि भाजपा सरकार पिछले 12 सालों से केवल नाम बदलने का खेल खेल रही है तथा उसके पास अपनी सरकारों की उपलब्धियों के नाम पर जनता को देने के लिए कुछ भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नाम पर चल रही ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलने के लिए बिल लाकर खतरनाक कदम उठाया है। भाजपा सरकार का यह निर्णय न केवल रोजगार के अधिकार कानून को कमजोर करने और भारत के सबसे जाने-माने कल्याणकारी कानून से महात्मा गांधी का नाम और उनके मूल्यों को मिटाने की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश ही नहीं बल्कि बेरोजगारों की लाईन लम्बी करने की कुत्सित चाल है। लालचन्द शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का ’’हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो’’ का वादा था और कांग्रेस ने अपना वादा पूरा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिन का रोजगार पक्का किया।
परन्तु केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा गांधी जी की विरासत, मजदूरों के अधिकारों और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी पर यह मिला-जुला हमला, अधिकारों पर आधारित कल्याणकारी काम को खत्म करने और उसकी जगह केंद्र से कंट्रोल होने वाली चौरिटी लाने की भाजपा-आरएसएस की बड़ी साजिश है। उन्होंने कहा कि रोजगार एक्ट से महात्मा गांधी का नाम हटाने का जानबूझकर लिया गया फैसला भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की विचारधारा को दर्शाता है। नाम बदलने का फैसला बीजेपी-आरएसएस की गांधीजी के मूल्यों के प्रति लंबे समय से चली आ रही बेचौनी और अविश्वास को दिखाता है और रोज़गार गारंटी कानून को खत्म करना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का लोगों पर केंद्रित कल्याणकारी कानून से जुड़ाव मिटाने की एक कोशिश है जिसे कभी भी बर्दास्त नहीं किया जायेगा