स्व डॉ. प्रभाकर उनियाल की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में उनकी स्मृति में काव्य-गोष्ठी का आयोजन

स्व डॉ. प्रभाकर उनियाल की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में एक काव्य गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचार-प्रसार प्रमुख श्री संजय जी, राज्यमंत्री डॉ. देवेन्द्र भसीन एवं जनकवि श्री अतुल शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कैलाश ध्यानी जी द्वारा प्रस्तुत बांसुरी वादन तथा निकुंज ध्यानी द्वारा तबला वादन ने वातावरण को संगीतमय और भावपूर्ण बना दिया। सुरों की इस संगति ने श्रोताओं को गहन अनुभूति प्रदान की। अतिथियों का परिचय श्री गजेंद्र खंडूरी जी द्वारा दिया गया। इसके पश्चात डॉ. प्रभाकर उनियाल जी के पुत्र श्री मधुकर उनियाल ने स्वागत अभिवादन किया। इसी क्रम में उन्होंने डॉ. प्रभाकर उनियाल द्वारा रचित कुछ कविताओं का पाठ कर अपने पिता को भावपूर्ण साहित्यिक श्रद्धांजलि अर्पित की।

काव्य-सत्र में श्रीमती कमलेश्वरी मिश्रा, नीता कुकरेती एवं अर्चना डिमरी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से स्मृति, संवेदना और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री डॉ. देवेन्द्र भसीन ने कहा कि डॉ. प्रभाकर उनियाल बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और उन्होंने साहित्य, समाज और संस्कृति—तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया।

डॉ. देवेन्द्र भसीन के उद्बोधन के पश्चात जनकवि श्री अतुल शर्मा ने डॉ. प्रभाकर उनियाल के जीवन, संघर्ष और वैचारिक यात्रा पर आधारित एक संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली काव्य पाठ प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने विशेष सराहना के साथ सुना। इसके पश्चात माननीय संजय जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. प्रभाकर उनियाल एक अत्यंत अनुशासित व्यक्तित्व के धनी थे तथा संवाद केंद्र की स्थापना उनके ही प्रयासों से संभव हुई, जो आज भी वैचारिक संवाद का सशक्त माध्यम बना हुआ है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री सुरेन्द्र मित्तल जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि डॉ. प्रभाकर उनियाल का साहित्य केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला विचार-स्रोत है। कार्यक्रम के अंत में स्व. डॉ. प्रभाकर उनियाल जी की पत्नी श्रीमती विनोद उनियाल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, कवियों एवं उपस्थित जनसमूह के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल, सुसंगठित एवं गरिमामय संचालन प्राची जुयाल द्वारा किया गया।

इस अवसर पर कमला पंत, सुबोध बहुगुणा, विनोद बहुगुणा, कांता बहुगुणा, विजय स्नेही, निधि पांथरी, सीता पांथरी, विनय पांथरी, मधु सिंह, पूनम गुप्ता, कुसुम बहुगुणा, बबीता सिंह, रचना उनियाल, भूपेंद्र शर्मा सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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