अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की संस्तुति दिए जाने पर कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का यह फैसला कोई नैतिक साहस नहीं, बल्कि जनता के बढ़ते दबाव और पीड़ित परिवार की लगातार गुहार का परिणाम है। कांग्रेस शुरू से ही इस प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग करती रही है, लेकिन सरकार ने लंबे समय तक मामले को दबाने और गुमराह करने का प्रयास किया।
लालचंद शर्मा ने कहा कि यदि सरकार वाकई संवेदनशील और न्यायप्रिय होती, तो स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता को वर्षों तक दर–दर की ठोकरें न खानी पड़तीं। तीन साल तक सत्ता के संरक्षण में सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई, अब जब जनाक्रोश चरम पर है तब मजबूरी में सीबीआई जांच की संस्तुति दी गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में “वीआईपी” को बचाने की मंशा से शुरुआत में जांच को कमजोर किया गया। आज भी सवाल कायम है कि आखिर इतना वक्त क्यों लगाया गया? क्या सरकार जवाबदेही से बचना चाहती थी?
कांग्रेस नेता ने कहा कि हमारी लड़ाई सिर्फ सीबीआई जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा दिलाने और न्याय सुनिश्चित कराने की है। कांग्रेस पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और जब तक अंकिता को पूरा न्याय नहीं मिलेगा, तब तक चुप नहीं बैठेगी।
लालचंद शर्मा ने सरकार से मांग की कि सीबीआई जांच को समयबद्ध बनाया जाए, किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण न मिले और जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में किसी भी तरह की लीपापोती हुई, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।