माघ मेला में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से प्रशासनिक दुर्व्यवहार का आरोप, निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग

सविनय निवेदन है कि अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा, उत्तराखंड भारत के संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा धार्मिक सम्मान की भावना के अंतर्गत आपका ध्यान एक अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक विषय की ओर आकृष्ट करना चाहती है। हाल के दिनों में यह अत्यंत पीड़ादायक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रयागराज माघ मेले जैसे पवित्र धार्मिक आयोजन के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ प्रशासन द्वारा किया गया व्यवहार न केवल सनातन परंपराओं का अपमान है, बल्कि देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी आहत करने वाला है। इस घटना ने संपूर्ण ब्राह्मण समाज को गहरी पीड़ा और आक्रोश में डाल दिया है।
इसके अतिरिक्त, यह भी चिंताजनक तथ्य है कि आज निरंतर ब्राह्मण समाज के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणियां, दुर्भावनापूर्ण बयानबाजी तथा लक्षित मानसिक उत्पीड़न सार्वजनिक और प्रशासनिक स्तर पर देखने को मिल रहे हैं। यह स्थिति सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संतुलन एवं राष्ट्रीय एकता के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकती है।
महामहिम,
हम विशेष रूप से आपका ध्यान 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए यूजीसी (UGC) एक्ट की ओर भी आकृष्ट करना चाहते हैं, जिसे लेकर ब्राह्मण समाज एवं पारंपरिक गुरुकुल, संस्कृत शिक्षण संस्थानों में व्यापक असंतोष एवं आशंकाएं व्याप्त हैं। यह कानून कहीं न कहीं सनातन शिक्षा परंपरा और ब्राह्मण समाज के बौद्धिक भविष्य को समाप्त करने की दिशा में एक सुनियोजित प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इसकी गहन, निष्पक्ष एवं संवैधानिक समीक्षा अत्यंत आवश्यक है।
अतः अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा, उत्तराखंड आपसे करबद्ध प्रार्थना करती है कि—
1.प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य जी के साथ हुई प्रशासनिक कार्रवाई की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
2.ब्राह्मण समाज के विरुद्ध हो रहे मानसिक, सामाजिक एवं वैचारिक उत्पीड़न पर सख्त रोक लगाते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
3.13 जनवरी 2026 से लागू यूजीसी एक्ट की सर्वसमावेशी समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सनातन शिक्षा, गुरुकुल व्यवस्था एवं स्वर्ण समाज के अधिकार सुरक्षित रहें।
4.समाज में सांस्कृतिक जागरण, सामाजिक संतुलन और सनातन मूल्यों के संरक्षण की दिशा में ठोस पहल की जाए
हमें पूर्ण विश्वास है कि आपका गरिमामय हस्तक्षेप समाज को नई दिशा, नया विश्वास और न्यायपूर्ण वातावरण प्रदान करेगा तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
इसी आशा एवं विश्वास के साथ यह ज्ञापन सादर प्रेषित है।
धन्यवाद।
मनमोहन शर्मा, उमाशंकर शर्मा, मनोज शर्मा, लालचंद शर्मा ,संजय खंडूड़ी,सीताराम नौटियाल, सावित्री शर्मा ,गिरीश चंद्र उप्रेती, संदीप चमोली, विजय मंगाई ,केशव नौटियाल ,नवनीत कुकरेती, संदीप चमोली, नवनीत कुकरेती ,सुरेंद्र दत्त शर्मा, घनश्याम अभिषेक नौटियाल राकेश थपलियाल, वि डी  झा      विचित्र सारस्वत ,विवेक मोहन श्रीवास्तव, कपिल गुप्ता ने ज्ञापन दिया
भवदीय,
अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा
उत्तराखंड

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