उत्तराखंड में बिजली दरों में 16.23 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव जनता की कमर तोड़ने की खुली साज़िश है। कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने इस फैसले को भाजपा सरकार का जनविरोधी और तानाशाही रवैया बताते हुए कहा कि जब जनता महंगाई से त्रस्त है, तब सरकार बिजली को और महंगा कर आम लोगों के घरों में अंधेरा फैलाना चाहती है।
लालचंद शर्मा ने कहा कि FPPCA के नाम पर बिजली लूट अब एक नियमित प्रक्रिया बन चुकी है। हर बार यूपीसीएल की नाकामी, कुप्रबंधन और घाटे की भरपाई सीधे जनता से करवाई जा रही है। ₹1,343 करोड़ के घाटे के लिए आम उपभोक्ता क्यों जिम्मेदार है? इसका जवाब सरकार को देना होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बड़े उद्योगपतियों को राहत देती है और उसका बोझ घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे दुकानदारों और मध्यम वर्ग पर डाल देती है। बिजली जैसी बुनियादी जरूरत को महंगा करना गरीब और मध्यम वर्ग पर सीधा प्रहार है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में बेरोज़गारी चरम पर है, महंगाई रिकॉर्ड तोड़ रही है और अब बिजली बिलों में बढ़ोतरी कर जनता को दो वक़्त की रोटी और उजाले के बीच चुनाव करने पर मजबूर किया जा रहा है। यह जनकल्याण नहीं, जनशोषण की नीति है।
लालचंद शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर ज़ोरदार आंदोलन करेगी। भाजपा सरकार को समझ लेना चाहिए कि जनता को हल्के में लेने की कीमत उसे सत्ता से चुकानी पड़ेगी।